उत्तर प्रदेशचन्दौली
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आज उधमपुर भारतीय जनता पार्टी कार्यालय बटल बालियाँ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि को समर्पण दिवस के रूप में मनाया गया. जिसकी अध्यक्षता अरुण गुप्ता जी द्वारा की गई जिसमें पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया जी, वरिष्ठ नेता सोमराज खजुरिया जी भी मुख्य रूप से समलित हुए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए ज़िला अध्यक्ष अरुण गुप्ता जी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था और छोटी ही उमर में उनके माता पिता का निधन हो गया था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आएं, आजीवन संघ के प्रचारक रहे। 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना हुई। 1952 में इसका प्रथम अधिवेशन कानपुर में हुआ और सन् 1967 में कालीकट अधिवेशन में उपाध्याय जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए और मात्र 43 दिन बाद ही 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई और इस सूचना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहने के बावजूद समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी नवीन विचारों का सदैव स्वागत किया। उन्हें भाजपा के पितृपुरुष भी कहा जाता है। वरिष्ठ नेता सोमराज खजुरिया जी ने भी दीनदयाल जी कि ज़ीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन और उनका मिशन सभी लोगों को प्रेरणा देता था । एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में भारत को बेहतर बनाने के लिए पं. दीनदयाल के चितन और विचार पीढि़यों को प्रेरित करने वाले हैं। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं के लिए पंडित दीनदयाल द्वारा दिखाया गया मार्ग प्रेरणा देता है। इसी कड़ी में 11 फरवरी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को भाजपा समर्पण दिवस के रूप में मनाती है पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया जी ने भी उपाध्याय जी के बारे में बताया कि अंत्योदय का नारा देने वाले दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि अगर हम एकता चाहते हैं, तो हमें भारतीय राष्ट्रवाद को समझना होगा, जो हिंदू राष्ट्रवाद है और भारतीय संस्कृति हिन्दू संस्कृति है। उनका कहना था कि भारत की जड़ों से जुड़ी राजनीति, अर्थनीति और समाज नीति ही देश के भाग्य को बदलने का सामर्थ्य रखती है। कोई भी देश अपनी जड़ों से कटकर विकास नहीं कर सका है। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होते ही मात्र 43 दिन बाद ही 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई थी.इसी प्रकार सभी ने अपने अपने विचार रख पंडित दीनदयाल जी कि पुण्यतिथि पर पुष्पअर्पित कर समर्पण कर श्रद्धांजलि दी।इस समर्पण दिवस पर सभी पूर्व MLA,DDC, BDC, मोर्चा एवं जिला के पधाधिकारी, नगरपालिका के पूर्व पार्षद एवं कार्य

आज उधमपुर भारतीय जनता पार्टी कार्यालय बटल बालियाँ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि को समर्पण दिवस के रूप में मनाया गया. जिसकी अध्यक्षता अरुण गुप्ता जी द्वारा की गई जिसमें पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया जी, वरिष्ठ नेता सोमराज खजुरिया जी भी मुख्य रूप से समलित हुए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए ज़िला अध्यक्ष अरुण गुप्ता जी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था और छोटी ही उमर में उनके माता पिता का निधन हो गया था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आएं, आजीवन संघ के प्रचारक रहे। 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना हुई। 1952 में इसका प्रथम अधिवेशन कानपुर में हुआ और सन् 1967 में कालीकट अधिवेशन में उपाध्याय जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए और मात्र 43 दिन बाद ही 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई और इस सूचना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहने के बावजूद समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी नवीन विचारों का सदैव स्वागत किया। उन्हें भाजपा के पितृपुरुष भी कहा जाता है। वरिष्ठ नेता सोमराज खजुरिया जी ने भी दीनदयाल जी कि ज़ीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन और उनका मिशन सभी लोगों को प्रेरणा देता था । एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में भारत को बेहतर बनाने के लिए पं. दीनदयाल के चितन और विचार पीढि़यों को प्रेरित करने वाले हैं। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं के लिए पंडित दीनदयाल द्वारा दिखाया गया मार्ग प्रेरणा देता है। इसी कड़ी में 11 फरवरी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को भाजपा समर्पण दिवस के रूप में मनाती है पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया जी ने भी उपाध्याय जी के बारे में बताया कि अंत्योदय का नारा देने वाले दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि अगर हम एकता चाहते हैं, तो हमें भारतीय राष्ट्रवाद को समझना होगा, जो हिंदू राष्ट्रवाद है और भारतीय संस्कृति हिन्दू संस्कृति है। उनका कहना था कि भारत की जड़ों से जुड़ी राजनीति, अर्थनीति और समाज नीति ही देश के भाग्य को बदलने का सामर्थ्य रखती है। कोई भी देश अपनी जड़ों से कटकर विकास नहीं कर सका है। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होते ही मात्र 43 दिन बाद ही 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई थी.इसी प्रकार सभी ने अपने अपने विचार रख पंडित दीनदयाल जी कि पुण्यतिथि पर पुष्पअर्पित कर समर्पण कर श्रद्धांजलि दी।इस समर्पण दिवस पर सभी पूर्व MLA,DDC, BDC, मोर्चा एवं जिला के पधाधिकारी, नगरपालिका के पूर्व पार्षद एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे

आज उधमपुर भारतीय जनता पार्टी कार्यालय बटल बालियाँ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि को समर्पण दिवस के रूप में मनाया गया. जिसकी अध्यक्षता अरुण गुप्ता जी द्वारा की गई जिसमें पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया जी, वरिष्ठ नेता सोमराज खजुरिया जी भी मुख्य रूप से समलित हुए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए ज़िला अध्यक्ष अरुण गुप्ता जी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था और छोटी ही उमर में उनके माता पिता का निधन हो गया था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आएं, आजीवन संघ के प्रचारक रहे। 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में ‘भारतीय जनसंघ’ की स्थापना हुई। 1952 में इसका प्रथम अधिवेशन कानपुर में हुआ और सन् 1967 में कालीकट अधिवेशन में उपाध्याय जी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए और मात्र 43 दिन बाद ही 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई और इस सूचना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहने के बावजूद समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी नवीन विचारों का सदैव स्वागत किया। उन्हें भाजपा के पितृपुरुष भी कहा जाता है।

वरिष्ठ नेता सोमराज खजुरिया जी ने भी दीनदयाल जी कि ज़ीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन और उनका मिशन सभी लोगों को प्रेरणा देता था । एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में भारत को बेहतर बनाने के लिए पं. दीनदयाल के चितन और विचार पीढि़यों को प्रेरित करने वाले हैं। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं के लिए पंडित दीनदयाल द्वारा दिखाया गया मार्ग प्रेरणा देता है। इसी कड़ी में 11 फरवरी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को भाजपा समर्पण दिवस के रूप में मनाती है

पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया जी ने भी उपाध्याय जी के बारे में बताया कि अंत्योदय का नारा देने वाले दीनदयाल उपाध्याय का कहना था कि अगर हम एकता चाहते हैं, तो हमें भारतीय राष्ट्रवाद को समझना होगा, जो हिंदू राष्ट्रवाद है और भारतीय संस्कृति हिन्दू संस्कृति है। उनका कहना था कि भारत की जड़ों से जुड़ी राजनीति, अर्थनीति और समाज नीति ही देश के भाग्य को बदलने का सामर्थ्य रखती है। कोई भी देश अपनी जड़ों से कटकर विकास नहीं कर सका है।

भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होते ही मात्र 43 दिन बाद ही 10/11 फरवरी 1968 की रात्रि में मुगलसराय स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई थी.इसी प्रकार सभी ने अपने अपने विचार रख पंडित दीनदयाल जी कि पुण्यतिथि पर पुष्पअर्पित कर समर्पण कर श्रद्धांजलि दी।इस समर्पण दिवस पर सभी पूर्व MLA,DDC, BDC, मोर्चा एवं जिला के पधाधिकारी, नगरपालिका के पूर्व पार्षद एवं कार्यकर्ता उपस्थित र

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