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नौपेड़वा CHC के अधीक्षक डॉ. गोपेश कुमार सिंह का तबादला, बायोमेडिकल कचरे के असुरक्षित निस्तारण और लापरवाही पर गिरी गाज

नौपेड़वा CHC के अधीक्षक डॉ. गोपेश कुमार सिंह का तबादला, बायोमेडिकल कचरे के असुरक्षित निस्तारण और लापरवाही पर गिरी गाज

जौनपुर। (बदलापुर/नौपेड़वा) जिले के नौपेड़वा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में फैली घोर अव्यवस्था और बायोमेडिकल कचरे के असुरक्षित व गैर-जिम्मेदाराना निस्तारण के मामले में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। अस्पताल की बदहाली और भारी खामियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, जन आक्रोश और जनप्रतिनिधियों की कड़ी नाराजगी को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने नौपेड़वा CHC के अधीक्षक डॉ. गोपेश कुमार सिंह का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। उन्हें अब सुइथाकला CHC भेज दिया गया है।

5 साल से जमे थे एक ही जगह, लगा तबादला नीति के उल्लंघन का आरोप

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. गोपेश कुमार सिंह पिछले 5 वर्षों से भी अधिक समय से नौपेड़वा CHC में तैनात थे, जो कि शासन की तबादला नीति का सीधा उल्लंघन था। क्षेत्र की जनता में लंबे समय से उनकी कार्यप्रणाली को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त था। आरोप है कि वे अपने मूल कर्तव्यों का निर्वहन करने और मरीजों की सेवा करने के बजाय, प्रभावशाली व रसूखदार लोगों के संपर्क में रहने को प्राथमिकता देते थे।

विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने जताई थी कड़ी नाराजगी

अस्पताल की इस बदहाली और अधीक्षक के अड़ियल व संवेदनहीन रवैये पर बदलापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने भी गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। विधायक के कड़े रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

अस्पताल परिसर बना बीमारियों का घर, खुले में फेंकी जा रही थीं संक्रमित सुइयां

सामने आई ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल परिसर के भीतर की स्थिति बेहद गंभीर और भयावह बनी हुई थी। इस्तेमाल की जा चुकीं मेडिकल सिरिंज, संक्रमित सुइयां, दवाओं के खाली डिब्बे और अन्य बेहद खतरनाक बायोमेडिकल कचरा खुले में ही फेंका जा रहा था। नियमों के मुताबिक इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होना चाहिए था, लेकिन ऐसा न होने के कारण यह कचरा हवा और जमीन के सीधे संपर्क में आकर गंभीर बीमारियां फैला रहा था। इसके अलावा परिसर में आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता था, जिससे बच्चों और आम नागरिकों में सीधे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो खुले में फेंकी गई इन संक्रमित सुइयों और सिरिंज से एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस-बी और सी जैसी जानलेवा बीमारियां फैलने की पूरी आशंका रहती है। हद तो तब हो गई जब मौके पर कुत्ता काटने के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन की सुइयां भी खुले में लावारिस हालत में पड़ी मिलीं, जो स्वास्थ्य प्रबंधन की घोर संवेदनहीनता को उजागर करता है।

उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग

अधीक्षक के स्थानांतरण के बाद स्थानीय नागरिकों ने थोड़ी राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन क्षेत्रवासियों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रशासन से अपील की है कि नौपेड़वा अस्पताल परिसर में बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित व वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए ताकि भविष्य में किसी महामारी के खतरे से बचा जा सके।

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