
प्रधान जिला न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर के नेतृत्व में न्यायपालिका ने मनाया विश्व पर्यावरण दिवस
तीन प्रमुख परिसरों में हुआ वृहद पौधरोपण, संरक्षण को बताया सामूहिक जिम्मेदारी
सूरजपुर/05 जून 2026/ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला न्यायालय सूरजपुर के संयुक्त तत्वावधान में वृहद वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। यह अभियान प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती विनीता वार्नर के मार्गदर्शन एवं प्रत्यक्ष नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस कौंसिल कार्यालय के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्तागण, शिक्षकगण, जेल प्रशासन तथा न्यायालयीन कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
हरियाली बढ़ाने तीन विशेष परिसरों का चयन पर्यावरण संतुलन बनाए रखने तथा शहर के विभिन्न हिस्सों में हरियाली का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से इस बार तीन विशेष परिसरों का चयन कर योजनाबद्ध तरीके से पौधरोपण किया गया। न्यायिक कर्मचारी निर्माणाधीन आवास परिसर की बाउंड्रीवाल के समीप सघन पौधरोपण किया गया, ताकि भविष्य में यहां निवासरत कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को स्वच्छ हवा एवं हरा-भरा वातावरण मिल सके। वहीं युवा पीढ़ी एवं विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम एवं जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में शिक्षकों एवं स्टाफ की उपस्थिति में पौधे लगाए गए। इसके अतिरिक्त जिला जेल परिसर सूरजपुर में आसपास के वातावरण को शुद्ध बनाने तथा बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया।
भविष्य की आवश्यकता के अनुरूप किया गया पौधों का चयन
अभियान के दौरान भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पौधों का चयन किया गया। परिसरों में आंवला, आम, कटहल जैसे फलदार तथा अशोक सहित अन्य छायादार एवं शोभायमान पौधे रोपे गए। इस पुनीत कार्य में जिले के समस्त न्यायिक अधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस कौंसिल के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्तागण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगण तथा न्यायालयीन कर्मचारियों ने पूरे उत्साह के साथ श्रमदान किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रधान जिला न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर ने संबोधित करते हुए कहा कि केवल पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जब तक वे बड़े वृक्ष न बन जाएं, तब तक उनका संरक्षण एवं पोषण करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।










