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अंतरराष्ट्रीय कवि बृजेंद्र अवस्थी के जन्मदिवस पर साहित्यकारों का समागम 

अंतरराष्ट्रीय कवि बृजेंद्र अवस्थ

बदायूँ। नूतन वर्ष के प्रथम दिन साहित्य स्तंभ कहे जाने वाले

अंतरराष्ट्रीय कवि काव्य गुरु डॉ बृजेंद्र अवस्थी के जन्म दिवस पर उनके कवि नगर स्थित आवास मनोरमा पर अनेक काव्य प्रेमियों के समागम के बीच वरिष्ठ कवि नरेंद्र गरल ने अपने द्वारा रचित पुस्तक पंख गीत संग्रह का अपने गुरु डॉ बृजेंद्र अवस्थी को समर्पण किया।

इस मौके पर डॉ बृजेंद्र अवस्थी की पावन स्मृतियों को नमन करते हुए उपस्थित कवि व शायरों ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की। अध्यक्षता डॉ. राम बहादुर ‘व्यथित’ ने की।

कार्यक्रम का प्रारंभ डा. सोनरूपा विशाल द्वारा सरस्वती वंदना पढ़कर किया गया।

गोष्ठी में डॉ.ब्रजेन्द्र अवस्थी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर साहित्य मनीषियों ने अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुति दी, साथ ही उपस्थित सभी साहित्यकारों ने ‘पंख’ गीत संग्रह के लिए नरेंद्र गरल जी को बधाई दी।

वरिष्ठ कवि नरेंद्र गरल ने पढ़ा –

अब हार हो या जीत हो परिणाम कुछ भी हो

कांधे से धनुष बाण उतारे न जाएंगे।

डॉ राम बहादुर व्यथित ने कहा –

हैं अश्रु भरे भारत मां को,

हा! आज लाडला लाल गया।

सरस्वती करती है क्रंदन,

हा! वरद पुत्र दिग भाल गया ।।

उस्ताद शायर सुरेन्द्र नाज़ ने कहा –

हिंदी के या उर्दू के अदब दोस्त जो भी हैं

हर एक की पसंद थे बृजेंद्र अवस्थी

 

वरिष्ठ शायर अहमद अमजदी ने सुनाया –

ज़ाते अवस्थी बड़ी महान

देश का गौरव देश की शान

 

महेश मित्र ने पढ़ा –

इस नए वर्ष में शुभ सितारे रहे

तुम हमारे रहो हम तुम्हारे रहे।

 

डॉ सोनूरूपा ने सुनाया –

मन के सागर में बहुत सी मछलियां हैं

एक जीवन है कई आसक्तियां हैं

 

शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने कहा –

उल्फत के गुल दिल में खिलाकर मैं भी देखूं तू भी देख।

फिर से हिन्दो पाक मिलाकर मैं भी देखूं तू भी देख।।

 

डॉ निशि अवस्थी ने पढ़ा –

वैसे आपने कुछ कुटुंब ही वैसे शहर की छांव में

किंतु देश का बहुत बड़ा परिवार बसा है गांव में।

 

कुमार आशीष ने सुनाया –

गुरुवर के बारे में कुछ भी लिख पाना आसान नहीं

भावों से तो हृदय भरा है, पर भाषा का ज्ञान नहीं।

 

ओजस्वी जौहरी ने पढ़ा –

क्या लगाओगे भला तुम दान लेखन का मेरे

है कलम अनमोल मेरी है ये अद्भुत लेखनी

 

अभिषेक अनंत ने पढ़ा-

स्वीकारो शब्द- पुत्र का आमंत्रण

हे काव्य मनीषी तुम्हें हृदय से शतवंदन

 

सुबीन महेश्वरी ने कहा –

भारत का भव्य ध्वज नभ में लहराएगा, अनुपम अनूठा दिव्य पंख यह महान है।

 

गायत्री मिश्रा ने पढ़ा –

मधुर हो गुनगुनाहट जब हमें गुरु याद आयेंगे

छुए जब धूप को ठंडक हमें गुरु याद आयेंगे।

 

आदित्य तोमर वजीरगंजवी ने पढ़ा –

आप तलवार बांटते जाएं

और मैं ढाल भी नहीं बांटू

 

इनके अतिरिक्त अशोक खुराना, डा. अक्षत अशेष, अर्चना अवस्थी, मीरा अग्रवाल, बृजेन्द्र अवस्थी के पौत्र प्रियम अवस्थी व श्रीयम अवस्थी, डा. अक्षत अशेष ने भी काव्यपाठ किया। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि अभिषेक अनंत ने किया।

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