
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के तराई बेल्ट में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने आम जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। जहाँ लोग शाम होते ही घरों में दुबक रहे हैं, वहीं शहर की सड़कों पर रात भर दौड़ने वाले स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) के डिलीवरी राइडर्स के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन द्वारा पर्याप्त अलाव की व्यवस्था न होने के कारण ये राइडर्स सड़कों पर कूड़ा जलाकर हाथ तापने को मजबूर हैं।
सर्दी का सितम और अभावों की मार
शहर के मुख्य चौराहों और रेस्टोरेंट्स के बाहर खड़े रहने वाले डिलीवरी राइडर्स का कहना है कि रात के समय तापमान गिरने से हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं। प्रशासन की ओर से लकड़ी की सुविधा न होने के कारण वे इधर-उधर बिखरे कचरे और प्लास्टिक को जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं। यह न केवल उनकी सेहत के लिए हानिकारक है, बल्कि शहर की वायु गुणवत्ता को भी प्रभावित कर रहा है।
प्रमुख बिंदु और समस्याएँ:
* अलाव का अभाव: शहर के प्रमुख पॉइंट जैसे छतरी चौराहा, स्टेशन रोड और ड्रमंड कॉलेज रोड पर अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं है।
* स्वास्थ्य का खतरा: प्लास्टिक और कूड़ा जलाने से निकलने वाला धुआं राइडर्स के फेफड़ों को नुकसान पहुँचा रहा है।
* मजबूरी की ड्यूटी: कड़ाके की ठंड में भी ऑर्डर समय पर पहुँचाने के दबाव के बीच उन्हें घंटों खुले आसमान के नीचे रुकना पड़ता है।
प्रशासन से राहत की अपील
डिलीवरी राइडर्स और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से पुरजोर अपील की है कि:
* शहर के उन मुख्य स्थानों को चिन्हित किया जाए जहाँ ये राइडर्स ऑर्डर के लिए इकट्ठा होते हैं।
* उन स्थानों पर तत्काल प्रभाव से लकड़ी और अलाव की व्यवस्था की जाए।
* रैन बसेरों के आसपास भी इन कामकाजी युवाओं के लिए बैठने और हाथ तापने का प्रबंध हो।
एक राइडर का दर्द: “रात के 12 बजे जब पूरा शहर सोता है, हम सड़क पर होते हैं। ठंड इतनी है कि बाइक चलाना मुश्किल है। अगर चौराहों पर प्रशासन लकड़ी डलवा दे, तो हमें बड़ी राहत मिलेगी।”
अब देखना यह है कि क्या नगर पालिका इन ‘ग्राउंड हीरोज’ की सुध लेती है या इन्हें इसी तरह जहरीले धुएं और ठिठुरन के बीच रातें गुजारनी पड़ेंगी।







