
बहराइच। राज्य सूचना आयुक्त डॉ. दिलीप अग्निहोत्री ने लो.नि.वि. बहराइच के निरीक्षण भवन में जनसूचना अधिकारियों के साथ संवाद करते हुए जनसूचना अधिकार से सम्बन्धित सभी अधिकारी व कर्मचारियों को निर्देश दिया कि एक्ट के प्राविधान का पालन करते हुए 30 दिवस में आवेदनकर्ता को वांछित सूचना अवश्य उपलब्ध करा दी जाय। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि एक्ट के अन्दर 30 दिवस की समयसीमा निर्धारित करने के पीछे मंशा यही है कि ज़रूरतमन्द लोगों को निर्धारित अवधि में मांगी गई सूचना प्राप्त हो जाय।

राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि प्रायः देखने में यह आ रहा है कि समयसीमा का पालन करने में जितनी गम्भीरता दिखानी चाहिए उसमें कहीं न कहीं लापरवाही दिखायी पड़ रही है। उन्होंने जनसूचना अधिकारियों को सुझाव दिया कि जब भी आपके सम्मुख कोई प्रार्थना-पत्र प्राप्त हो तो प्रथमदृष्टया यह देखें कि वांछित सूचना कहां से मंगानी है, शुल्क की मांग करनी है या आवेदन-पत्र का अंतरण करना है, तो भी सारी प्रक्रिया निर्धारित समयान्तर्गत पूर्ण की जाये। उन्होंने कहा कि एक्ट के अन्तर्गत समस्त प्राविधानों का पालन करना जनसूचना अधिकार से जुड़े हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मंदारी है। उन्होंने कहा कि मा. न्यायालयों का भी यही निर्देश है कि फरियादी को देर से सूचना देना न्यायसंगत नहीं है देर से सूचना मिलने से मांगी गई सूचना का महत्व कम हो जाता है।
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अग्निहोत्री ने सभी जनसूचना अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में यह सुनिश्चित करें कि आवेदनकर्ता को समय से सूचना उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि आयोग के समक्ष यह शिकायत नहीं मिलनी चाहिए कि समयसीमा को लेकर किसी स्तर पर लापरवाही की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश किसी प्रकरण में समयसीमा का पालन नहीं होता है तो ऐसे मामलों में आयोग के समक्ष स्पष्टीकरण के साथ ऐसे प्रकरण प्रस्तुत किये जायें कि किन कारणों से समयसीमा का पालन नहीं किया जा सका है। आयुक्त डॉ. अग्निहोत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि गरीब, पीड़ित, ज़रूरतमन्दों के आवेदन-पत्रों का पूरी संजीदगी के साथ निर्धारित समय में निस्तारण कर वांछित सूचना उपलब्ध करायी जाय।







