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“एटीएम से 25000 निकालना पड़ा भारी, कार्ड बदलकर 40 हजार की ठगी… कुशीनगर के सुकरौली में जालसाजों का शातिर खेल”

कुशीनगर जिले के सुकरौली नगर पंचायत से एटीएम जालसाजी का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों की सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल ठगी की शातिर चाल को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि थोड़ी सी लापरवाही किस तरह बड़ी आर्थिक क्षति का कारण बन सकती है।

कुशीनगर जिले के सुकरौली नगर पंचायत से एटीएम जालसाजी का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों की सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल ठगी की शातिर चाल को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि थोड़ी सी लापरवाही किस तरह बड़ी आर्थिक क्षति का कारण बन सकती है।

पीड़ित व्यक्ति की पहचान नूर मोहम्मद के रूप में हुई है, जो सुकरौली नगर पंचायत के निवासी हैं। नूर मोहम्मद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सुकरौली शाखा के खाताधारक हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए वह बैंक के एटीएम से पैसे निकालने पहुंचे थे। उन्होंने एटीएम मशीन से मात्र 25000 रुपये की निकासी की थी। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही लेनदेन उनके लिए भारी नुकसान का कारण बन जाएगा।
पीड़ित के अनुसार, जब वह एटीएम मशीन पर लेनदेन कर रहे थे, तभी उनके बगल में एक अज्ञात व्यक्ति आकर खड़ा हो गया। इसी दौरान उस व्यक्ति ने अचानक नूर मोहम्मद के हाथ से एटीएम कार्ड छीन लिया। नूर मोहम्मद ने तुरंत विरोध किया, जिस पर आरोपी ने कार्ड वापस कर दिया। उस समय नूर मोहम्मद को लगा कि शायद कोई गलतफहमी हुई है और मामला यहीं खत्म हो गया है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही थी।
आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से नूर मोहम्मद का असली एटीएम कार्ड बदल दिया था और नकली या किसी अन्य व्यक्ति का कार्ड उनके हाथ में थमा दिया। इस पूरी घटना के दौरान नूर मोहम्मद को जरा भी आभास नहीं हुआ कि उनके साथ ठगी हो चुकी है। वह सामान्य रूप से एटीएम से लौट आए।
कुछ समय बाद नूर मोहम्मद के मोबाइल फोन पर बैंक की ओर से एक मैसेज आया। मैसेज में लिखा था कि उनके खाते से चालीस हजार रुपये की निकासी की गई है। यह संदेश पढ़ते ही नूर मोहम्मद के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत अपने पास मौजूद एटीएम कार्ड की जांच की, तब जाकर उन्हें पता चला कि यह कार्ड उनका है ही नहीं।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए नूर मोहम्मद ने तत्काल बैंक को इसकी सूचना दी। बैंक द्वारा तुरंत उनके खाते को लॉक कर दिया गया, ताकि आगे कोई और वित्तीय नुकसान न हो सके। हालांकि, तब तक ठग अपने मंसूबों में कामयाब हो चुका था और चालीस हजार रुपये की रकम निकाल चुका था।
इसके बाद पीड़ित नूर मोहम्मद ने हाटा कोतवाली पहुंचकर पूरे मामले की लिखित तहरीर दी और न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस कारण वह और उनका परिवार लगातार मानसिक तनाव में हैं और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वहीं, इस मामले पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों का कहना है कि एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मंगाई जा रही है। बैंक अधिकारियों के अनुसार, एटीएम की सीसीटीवी फुटेज दिल्ली स्थित सर्वर से प्राप्त की जाती है। जैसे ही फुटेज उपलब्ध होगी, संदिग्ध व्यक्ति की पहचान कर पुलिस को सौंप दी जाएगी और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि एटीएम से लेनदेन के दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एटीएम का उपयोग करते समय किसी भी अजनबी की मदद लेने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा नजदीक खड़ा हो, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा गार्ड या बैंक कर्मचारियों को सूचना देनी चाहिए।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए और आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
कुल मिलाकर, सुकरौली की यह घटना न केवल एक व्यक्ति की ठगी की कहानी है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि डिजिटल और एटीएम लेनदेन के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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