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सुकरौली में खेत बने रणक्षेत्र, नीलगाय और आवारा पशुओं से बेहाल किसान

सुकरौली विकासखंड क्षेत्र में इन दिनों नीलगायों और आवारा पशुओं का आतंक किसानों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। सुबह और शाम के समय खेतों में घुसकर नीलगायें खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। वहीं दूसरी ओर आवारा पशु भी खेतों में चरकर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। इस दोहरी मार से किसान बेहद परेशान हैं

कुशीनगर (सुकरौली), बुधवार।
सुकरौली विकासखंड क्षेत्र में इन दिनों नीलगायों और आवारा पशुओं का आतंक किसानों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। सुबह और शाम के समय खेतों में घुसकर नीलगायें खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। वहीं दूसरी ओर आवारा पशु भी खेतों में चरकर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। इस दोहरी मार से किसान बेहद परेशान हैं और उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार, गेहूं, सरसों, गन्ना, मटर और सब्जी की फसलें नीलगायों के हमले से सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। रात के समय तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब झुंड के झुंड खेतों में घुस जाते हैं। कई किसानों ने फसलों की सुरक्षा के लिए तारबंदी और पहरेदारी का सहारा लिया, लेकिन यह उपाय भी नाकाफी साबित हो रहा है। लगातार नुकसान के कारण किसान मानसिक तनाव में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आवारा पशुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। छुट्टा छोड़े गए गोवंश सड़कों के साथ-साथ खेतों में घूमते रहते हैं, जिससे न केवल फसलें नष्ट हो रही हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। किसानों ने प्रशासन से गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्था को दुरुस्त करने और नीलगायों से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
इस संबंध में किसानों का सवाल है कि सरकार आखिर कब तक उनकी समस्याओं को अनदेखा करती रहेगी। वे मुआवजे की व्यवस्था, खेतों की सामूहिक सुरक्षा योजना और वन विभाग के सहयोग से नीलगायों को आबादी से दूर रखने की मांग कर रहे हैं। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में किसानों का आक्रोश और बढ़ सकता है।

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