धार/ ब्यूरो चीफ (सुरेन्द्र दुबे)मध्य प्रदेश के धार जिले की पीथमपुर तहसील अंतर्गत जीवन ज्योति एवं पीथमपुर क्षेत्र में संचालित कई निजी विद्यालयों पर शासन द्वारा निर्धारित शैक्षणिक एवं आधारभूत सुविधाओं के मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि कई विद्यालयों में विद्यार्थियों से मनमानी फीस वसूली जा रही है, जबकि उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, अनेक विद्यालयों में पर्याप्त हवादार कक्षाएं, समुचित फर्नीचर, पुस्तकालय, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, स्वच्छ पेयजल, अलग-अलग शौचालय, खेल मैदान तथा प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुविधाओं के बिना विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास प्रभावित होता है और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है।
शासन के निर्धारित मानकों के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण, प्रशिक्षित शिक्षक, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, खेलकूद की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है। यदि इन मानकों का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कार्रवाई की अपील
क्षेत्र के अभिभावकों, सामाजिक संगठनों एवं जागरूक नागरिकों ने जिला शिक्षा अधिकारी, धार से मांग की है कि पीथमपुर तहसील के जीवन ज्योति क्षेत्र में संचालित सभी निजी विद्यालयों का तत्काल संयुक्त निरीक्षण कराया जाए। जांच में यदि शासन के निर्धारित मानकों का उल्लंघन, आधारभूत सुविधाओं की कमी, विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी अथवा अन्य अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित विद्यालय संचालकों के विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन के प्रावधानों के अनुसार नोटिस जारी कर मान्यता संबंधी कार्रवाई, आर्थिक दंड तथा आवश्यक होने पर मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए नियमित निरीक्षण व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार के शोषण पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी इस गंभीर मामले में कितनी शीघ्रता से जांच के आदेश जारी करते हैं और दोषी पाए जाने वाले विद्यालयों के विरुद्ध क्या कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।












