
*बाल कल्याण समिति के जनजागरण अभियान का सकारात्मक परिणाम।
1098 ने दिया 13 वर्षीय बालक को नया जीवन।
जालना से रेस्क्यू बालक का सुरक्षित पुनर्वास; बाल संरक्षण के नवाचारों और ‘परामर्श मीमांसा’ में खंडवा के प्रयासों की सराहना।
खंडवा। बाल संरक्षण को लेकर न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा द्वारा किए जा रहे जनजागरण और नवाचारों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। महाराष्ट्र के जालना जिले से रेस्क्यू किए गए 13 वर्षीय बालक को बाल श्रम से मुक्त कराकर उसके सर्वोत्तम हित में दादी के संरक्षण में सुरक्षित पुनर्वास की पहल की गई। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि बालक के अनुसार मां की मृत्यु के बाद उसकी पढ़ाई छूट गई थी और उसे मजदूरी के लिए भेज दिया गया। करीब एक वर्ष से वह गोबर उठाने, साफ-सफाई सहित अन्य कार्य कर रहा था। बालक ने बताया कि इसके बदले करीब 40 हजार रुपये वार्षिक दिए जाने की बात कही गई थी। उसने किसी तरह अपनी दादी से संपर्क कर अपनी स्थिति बताई।
*1098 पर सूचना से हुई कार्रवाई*
दादी ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दी। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन जालना की टीम ने कार्रवाई करते हुए बालक को रेस्क्यू किया और बाल गृह में सुरक्षित रखा। प्रकरण जालना बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा को स्थानांतरित किया गया।
खंडवा में समिति ने बालक की बाल-अनुकूल काउंसलिंग की। उसके कथन, सामाजिक अन्वेषण प्रतिवेदन और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करने के बाद बालक के सर्वोत्तम हित, सुरक्षा, शिक्षा और पारिवारिक पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए दादी के संरक्षण में पुनर्वास की पहल की गई।
*नवाचारों से जनभागीदारी को मिल रहा विस्तार*
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति द्वारा बाल न्याय शिविर, बाल चौपाल, काउंसलिंग, बाल अधिकार जागरूकता और परिवार आधारित पुनर्वास जैसी गतिविधियों के माध्यम से बाल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य बच्चों से जुड़े संकट की समय पर पहचान और संबंधित तंत्र तक सूचना पहुंचाना है।
*‘परामर्श मीमांसा’ में खंडवा के प्रयासों की सराहना*
बाल संरक्षण में काउंसलिंग आधारित हस्तक्षेप और पुनर्वास के इन प्रयासों का उल्लेख राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर के ‘परामर्श मीमांसा’ कार्यक्रम में भी हुआ, जहां खंडवा में किए जा रहे बाल संरक्षण संबंधी नवाचारों और परामर्श प्रक्रिया की सराहना मिली। इससे बाल संरक्षण में संवेदनशील काउंसलिंग और परिवार आधारित पुनर्वास के महत्व को बल मिला है।समिति के सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, स्वप्निल जैन एवं कविता पटेल द्वारा भी बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में काउंसलिंग एवं पुनर्वास प्रक्रिया में सहयोग किया जा रहा है।
*बाल श्रम के विरुद्ध कानूनी संरक्षण*
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 में 2016 के संशोधन के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के रोजगार अथवा कार्य पर सामान्यतः प्रतिबंध है, कानून में निर्धारित अपवादों के अधीन। वहीं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत श्रम कानूनों के उल्लंघन में काम करते पाए जाने वाले बच्चे को देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक के रूप में संरक्षण दिया जा सकता है।
*एक सूचना बदल सकती है बच्चे का जीवन : प्रवीण शर्मा*
प्रवीण शर्मा, अध्यक्ष, न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा ने कहा कि “बाल संरक्षण की शुरुआत बच्चे की बात को गंभीरता से सुनने और उसकी स्थिति की जानकारी समय पर संबंधित तंत्र तक पहुंचाने से होती है। इस मामले में दादी द्वारा 1098 पर सूचना देना महत्वपूर्ण कदम रहा। बच्चे को केवल श्रम से मुक्त कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा, शिक्षा, मानसिक स्थिति और सुरक्षित पारिवारिक पुनर्वास सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।”













