
चौपारण। पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला और विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव के बीच का राजनीतिक विवाद सोमवार को और गहरा गया। दोनों नेताओं के बीच जारी जुबानी जंग अब जमीन के हुक्मनामे से निकलकर पुराने मुकदमों और सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के आरोपों तक पहुंच चुकी है।
हुक्मनामे पर राजदेव यादव का पलटवार
जमीन के हुक्मनामे को लेकर पूर्व विधायक द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए राजदेव यादव ने एक प्रेस वार्ता बुलाई। अपने पिता ननकु महतो से जुड़े दस्तावेजों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “मेरे पिता का जन्म 1911 में हुआ था और जमीन का हुक्मनामा 1935 का है। इस हिसाब से उस वक्त उनकी उम्र 24 वर्ष थी। पूर्व विधायक द्वारा उम्र को लेकर फैलाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह तथ्यहीन और झूठे हैं।”
पूर्व विधायक को घेरा, हॉर्स ट्रेडिंग और अतिक्रमण की जांच की मांग
पलटवार करते हुए राजदेव यादव ने पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला के पुराने मामलों को हवा दे दी। उन्होंने वर्ष 2012-13 के राज्यसभा चुनाव के दौरान हुए कथित हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) मामले का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक के आवास के आसपास पीडब्ल्यूडी (PWD) और वन विभाग की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। राजदेव ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय सरकारी जांच की मांग करते हुए कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले पूर्व विधायक को खुद के मामलों पर स्थिति साफ करनी चाहिए।
अकेला बोले- आरोप बेबुनियाद, हिम्मत है तो प्रमाण दिखाएं
दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों पर पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राजदेव यादव के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया। अकेला ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो राजदेव को इसके पुख्ता सबूत जनता के सामने सार्वजनिक करने चाहिए।
बढ़ती जा रही है राजनीतिक तपिश
इस बयानबाजी के बाद चौपारण का राजनीतिक पारा पूरी तरह चढ़ गया है। जो विवाद सिर्फ एक जमीन के कागज से शुरू हुआ था, वह अब व्यक्तिगत और पुराने कानूनी मामलों तक आ गया है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे विवाद का सच अब अदालती दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।













