खरगोनमध्यप्रदेश

मिर्च में लीफ कर्ल रोग की रोकथाम के लिए समेकित नाशीजीव प्रबंधन अपनाएं

पिले चिपचिपे कार्ड लगाकर सफेद मक्खी की निगरानी एवं नियंत्रण करें

मिर्च में लीफ कर्ल रोग की रोकथाम के लिए समेकित नाशीजीव प्रबंधन अपनाएं

 

पीले चिपचिपे कार्ड लगाकर सफेद मक्खी की निगरानी एवं नियंत्रण करें

 

विल्ट रोग के लक्षण दिखने पर जड़ों के पास करें प्रभावी उपचार

 

खरगोन  से  अनिल बिलवे की रिपोर्ट. ..

09 सितम्बर 2026। मिर्च फसल में लीफ कर्ल (पर्ण कुंचन) विषाणु रोग एवं विल्ट (उखटा) रोग की रोकथाम के लिए किसानों द्वारा समय पर समेकित नाशीजीव प्रबंधन (IPM) अपनाना आवश्यक है। कृषि महाविद्यालय खण्डवा एवं आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र खरगोन के कृषि वैज्ञानिकों ने फसल को इन रोगों से बचाने के लिए विभिन्न उपाय अपनाने की सलाह दी है।

 

समेकित नाशीजीव प्रबंधन के तहत खेत एवं मेंड़ों के आसपास उगने वाले खरपतवार तथा रोग के वैकल्पिक पोषी पौधों को नष्ट करने की सलाह दी गई है। यांत्रिक उपाय के रूप में खेत में प्रति एकड़ 15 से 20 पीले चिपचिपे कार्ड लगाने चाहिए। इससे सफेद मक्खी की निगरानी के साथ-साथ उसके नियंत्रण में भी मदद मिलती है। रोगग्रस्त पौधों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उन्हें उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

 

जैविक नियंत्रण के लिए बेवेरिया बेसियाना (1.15 प्रतिशत डब्ल्यूपी) 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जा सकता है। इसी प्रकार नीम आधारित उत्पादों में 1500 पीपीएम नीम तेल 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी अथवा नीम बीज गिरी सत (NSKE) 5 प्रतिशत का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

 

आवश्यकता पड़ने पर रासायनिक नियंत्रण अंतिम विकल्प के रूप में किया जाना चाहिए। सफेद मक्खी की संख्या आर्थिक क्षति स्तर 8 से 10 मक्खी प्रति पत्ती से अधिक होने पर थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत WG की 0.2 से 0.3 ग्राम प्रति लीटर, डायफेंथियूरॉन 50 प्रतिशत WP की 1 ग्राम प्रति लीटर अथवा फ्लोनिकामिड 50 प्रतिशत WG की 0.3 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कीटनाशकों का चक्रानुक्रम अपनाते हुए एक ही कीटनाशक समूह का बार-बार प्रयोग नहीं करना चाहिए, ताकि कीटों में प्रतिरोधकता विकसित न हो।

 

पोषक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। किसानों को संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने तथा नाइट्रोजन की अधिकता से बचने की सलाह दी गई है। नाइट्रोजन की अधिकता से पौधों में कोमल वृद्धि होती है, जो सफेद मक्खी को आकर्षित कर सकती है। फसल लेने से पूर्व मृदा परीक्षण कराकर आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों का प्रयोग करना चाहिए। पोटाश की उचित मात्रा पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।

 

विल्ट (उखटा) रोग के नियंत्रण के लिए रोग के लक्षण दिखाई देने पर पौधों के पास की मिट्टी में जड़ों के आसपास ट्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है। इसके लिए 10 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से बोर्डो मिश्रण अथवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का घोल बनाकर जड़ों के पास मिट्टी में देना चाहिए।

 

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि कीटनाशकों एवं रोग नियंत्रण रसायनों के उपयोग से पूर्व स्थानीय कृषि महाविद्यालय अथवा कृषि विज्ञान केन्द्र से अनुशंसित मात्रा एवं सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की पुष्टि अवश्य करें तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही दवाओं का प्रयोग करें।

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