*बाल श्रम रोकथाम अभियान से दुकानदारों में हड़कंप, सूचना मिलते ही बच्चों को हटाया*
*बॉम्बे बाजार सहित प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त जांच, दुकानों में काम कर रहे बच्चों की जुटाई जानकारी*
खंडवा। बाल श्रम रोकथाम को लेकर शहर में चलाए गए संयुक्त अभियान की सूचना मिलते ही बॉम्बे बाजार क्षेत्र के कुछ दुकानदारों में हड़कंप मच गया। टीम के पहुंचने की जानकारी मिलते ही कुछ दुकानों से बच्चों को बाहर भेज दिया गया। इसके बाद संयुक्त टीम ने दुकानों एवं प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर बच्चों और किशोरों की आयु तथा कार्य की प्रकृति से संबंधित जानकारी जुटाई। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि अभियान न्यायपीठ बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं विशेष किशोर पुलिस इकाई के समन्वय से बॉम्बे बाजार, खड़गपुरा, गिदवानी मार्केट और फुलगली में चलाया गया। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के नियोजन पर प्रतिबंध है। वहीं 14 से 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों को अधिनियम में निर्धारित खतरनाक व्यवसायों या प्रक्रियाओं में नियोजित नहीं किया जा सकता। उल्लंघन मिलने पर संबंधित नियोक्ता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
न्यायपीठ बाल कल्याण समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा कि बच्चों को श्रम से मुक्त कर शिक्षा और संरक्षण से जोड़ना अभियान का उद्देश्य है। उन्होंने कहा, “बच्चों के हाथ में औजार नहीं, किताब होनी चाहिए।”
अभियान में किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य एडवोकेट पन्ना गुप्ता, कल्पना जायसवाल, बाल कल्याण समिति सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, स्वप्निल जैन, कविता पटेल, विशेष किशोर पुलिस इकाई प्रभारी सुनीता जोसफ, आरक्षक शर्मिला मोरे, नेहा कुल्हारे तथा श्रम विभाग से रविन्द्र सिंह शामिल रहे।
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