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शिक्षा को नवाचार से, विद्यार्थियों को अवसरों से और समाज को संवेदनशीलता से जोड़ रहीं उत्कृष्ट शिक्षिका श्रद्धा गुप्ता।

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शिक्षा को नवाचार से, विद्यार्थियों को अवसरों से और समाज को संवेदनशीलता से जोड़ रहीं उत्कृष्ट शिक्षिका श्रद्धा गुप्ता।

खंडवा। शिक्षक दिवस के अवसर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रुस्तमपुर की शिक्षिका श्रीमती श्रद्धा गुप्ता शिक्षा के क्षेत्र में अपने नवाचारपूर्ण, रचनात्मक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। उनके लिए शिक्षण केवल पाठ्यक्रम पूरा करने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता को पहचानकर उसे उसकी वर्तमान स्थिति से आगे ले जाने और जीवन के लिए तैयार करने का सतत प्रयास है।समाजसेवी सुनील जैन ने बताया की श्रीमती गुप्ता ने पारंपरिक शिक्षण पद्धति को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए AI, ICT, AR, 3D वीडियो, स्मार्ट टीवी, DIKSHA, Canva, PowerPoint, Scratch एवं अन्य डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर कक्षा-कक्ष को अधिक रोचक, संवादात्मक और गतिविधि आधारित बनाया है। जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल एवं दृश्यात्मक तरीके से समझाने के उनके प्रयासों ने विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और सीखने की उत्सुकता को बढ़ाया है।
‘हर बच्चे की व्यक्तिगत सीखने की यात्रा’ बना शिक्षण का नया मॉडल
श्रीमती श्रद्धा गुप्ता की शैक्षिक कार्यशैली का एक विशिष्ट पक्ष है—प्रत्येक विद्यार्थी की Learning Gap को पहचानकर उसके अनुरूप व्यक्तिगत शिक्षण रणनीति तैयार करना। उन्होंने इस सोच को विकसित किया कि एक ही कक्षा में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थी एक समान सीखने के स्तर पर नहीं होते, इसलिए सभी को एक जैसी शिक्षण पद्धति देना पर्याप्त नहीं है।
इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों के वर्तमान सीखने के स्तर का आकलन, Learning Gap की पहचान, व्यक्तिगत लक्ष्य निर्धारण, स्तरानुकूल अभ्यास, डिजिटल एवं AI आधारित सामग्री तथा नियमित पुनर्मूल्यांकन को शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है। कमजोर विद्यार्थियों के लिए remedial support, अपेक्षित स्तर पर विद्यार्थियों के लिए अभ्यास तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए enrichment activities के माध्यम से प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि इस पहल का मूल मंत्र है—“कोई बच्चा कमजोर नहीं होता, उसकी सीखने की गति अलग होती है; शिक्षक का दायित्व है कि वह उस गति को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर दे।” इस पहल के माध्यम से शिक्षण को केवल अंक और परीक्षा परिणाम तक सीमित न रखकर Learning Growth अर्थात विद्यार्थी ने अपने प्रारंभिक स्तर से कितनी प्रगति की, इसे सफलता का महत्वपूर्ण मानक बनाया जा रहा है। विद्यार्थियों की प्रगति का नियमित रिकॉर्ड रखकर उनकी उपलब्धियों और आवश्यकताओं के आधार पर शिक्षण रणनीति में परिवर्तन किया जाता है। इस प्रकार कक्षा-कक्ष में Diagnosis → Personalised Learning → Intervention → Assessment → Improvement की सतत प्रक्रिया विकसित की जा रही है।
ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीक और अवसरों से जोड़ने का प्रयास
उनकी कार्यशैली की विशेषता यह है कि वे विद्यार्थियों को केवल अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें विज्ञान, नवाचार, रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण, नेतृत्व, डिजिटल कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ती हैं। विद्यार्थियों को कम लागत की शिक्षण-अधिगम सामग्री तैयार करने, विज्ञान मॉडल बनाने, Coding एवं डिजिटल गतिविधियों में भाग लेने तथा अपनी कल्पनाशीलता को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए प्रेरित किया जाता है।
विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में उनके कार्यों को विभिन्न स्तरों पर पहचान मिली है। India International Science Festival 2024 में मध्यप्रदेश से चयनित शिक्षिका के रूप में उनकी सहभागिता तथा उनके वर्षा जल संरक्षण आधारित AI मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना उनके नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण का प्रमाण है। विद्यार्थियों को INSPIRE Award, विज्ञान गतिविधियों, ओलंपियाड एवं विभिन्न शैक्षणिक मंचों से जोड़कर उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को बड़े मंचों तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया है।
कक्षा से समुदाय और प्रकृति तक
सुनील जैन ने बताया कि श्रीमती श्रद्धा गुप्ता का कार्यक्षेत्र केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। वे विद्यालय और समुदाय के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करते हुए पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता, पोषण, बालिका शिक्षा, मासिक धर्म स्वच्छता, सामाजिक जागरूकता एवं पौधरोपण जैसी गतिविधियों को विद्यार्थियों और समुदाय से जोड़ती रही हैं।
“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत विद्यालय में लगभग 200 पौधों का रोपण एवं सीड बॉल निर्माण, बोरी बंधान जैसे अभिनव कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और संरक्षण की भावना विकसित करने का प्रयास किया।
उनका मानना है कि “जिस शिक्षा से विद्यार्थी केवल स्वयं आगे बढ़ना सीखे, वह अधूरी है; सच्ची शिक्षा वह है जो उसे समाज और प्रकृति के लिए कुछ करने की प्रेरणा दे।”
सम्मानों से अधिक विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देती हैं महत्व
शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण को विभिन्न मंचों पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है। उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। खेल के क्षेत्र में भी उन्होंने राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त कर विद्यार्थियों के समक्ष यह संदेश प्रस्तुत किया कि शिक्षक स्वयं भी निरंतर सीखने, आगे बढ़ने और उत्कृष्टता प्राप्त करने का उदाहरण बन सकता है।
श्रीमती श्रद्धा गुप्ता की पहचान आज केवल एक विषय-शिक्षिका के रूप में नहीं, बल्कि “नवाचार को कक्षा तक और कक्षा को समाज तक ले जाने वाली शिक्षिका” के रूप में बन रही है। उनका प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी पारिवारिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण सीखने के अवसरों से वंचित न रहे।
उनकी शैक्षिक दृष्टि का सार है—
“हर बच्चे की Learning Gap पहचानना, हर बच्चे के लिए लक्ष्य तय करना और हर बच्चे को उसकी पहली बड़ी उपलब्धि तक पहुँचाना।”
शिक्षक दिवस पर ऐसी शिक्षिका का कार्य यह संदेश देता है कि एक शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि उसके पुरस्कारों में नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों की आँखों में दिखाई देती है, जिनके सपनों को उसने उड़ान दी है। श्रीमती श्रद्धा गुप्ता इसी विचार को अपना कर्म मानकर शिक्षा, तकनीक, नवाचार और संवेदनशीलता के माध्यम से विद्यार्थियों, विद्यालय और समाज के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर सक्रिय हैं।

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